एक व्यक्ति – एक वोट – एक मोल :

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यह विषय कक्षा-9 की राजनीति विज्ञान की पुस्तक *लोकतांत्रिक राजनीति -1* का है!
इसे पढ़ने के बाद पता चला कि किस तरह लोकतंत्र के लिए होने वाला संघर्ष सार्वभौम व्यस्क मताधिकार के साथ जुड़ा है!
“सार्वभौम व्यस्क मताधिकार मतलब, सभी व्यस्क- औरत या मर्द, अमीर या गरीब, श्वेत या अश्वेत- को मतदान करने का अधिकार!”
अब इस सिद्धांत को लगभग पूरी दुनिया ने मान लिया है! पर किसी व्यक्ति को मतदान के समान अधिकार से वंचित करने के उदाहरण भी कम नहीं  हैं!
• साउदी अरब में औरतों को वोट देने का अधिकार नहीं है!
• एस्टोनिया ने अपने यहां नागरिकता के नियम कुछ इस तरह से बनाए हैं कि रूसी अल्पसंख्यक समाज के लोगों को मतदान का अधिकार हासिल करने में मुश्किल होती है!
• फिजी की चुनाव प्रणाली में वहां के मूल वासियों के वोट का महत्व भारतीय मूल के फिजी नागरिक के वोट से ज्यादा है!

लोकतंत्र राजनैतिक समानता के बुनियादी सिद्धांत पर आधारित है!
इसी प्रकार : लोकतंत्र में हर व्यस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और हर वोट का एक समान मूल्य होना चाहिए!

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5 thoughts on “एक व्यक्ति – एक वोट – एक मोल :

      1. Haa, achha hai, political knowledge bhi milna chaiye na, atleast pata hona chaiye ki duniya me kya kya ho raha hai! Likhte rahiye. 😊

        Liked by 1 person

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