Critics-

It doesn’t matter what you do or how you look. You’ll always have those people who still have to say something.

Critics” भरे पड़े हैं दुनिया में, आपको ढूंढ ढूंढकर परेशान करने के लिए! आप चाहे कहीं भी हों, ये आपको हर वो जगह मिल जाऐंगे जहां आप शान्ति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं! आपके किए हुए हर वो काम में नुस्ख निकालने के लिए हमेशा तैयार बैठे रहते हैं! दरअसल इन्हें परवाह नहीं होती, कि इसकी वजह से आपको कैसा महसूस हो सकता है! इन्हें सिर्फ परवाह होती है तो इस बात की, कि किस तरह आप में खामियां निकालें!

ये आपके हर वो काम में खामियां निकालते हैं जिससे आपको खुशी मिलती है या मिलने वाली है!
ऐसे लोग आपको हर जगह आसानी से मिल जाऐंगे!
जैसे कि आपके पड़ोस में रहने वाली अण्टी जी, या फिर शर्मा जी, या गुप्ता जी, या आपके क्लास में आपके सहपाठी, और आखिरी में जो बच जाऐ उन्हें अपने रिश्तेदारों की फेहरिस्त में डाल दीजिए!
आखिर रिश्तेदार ही तो बचते हैं जिन्हें आपके काम में खामियां निकालकर सबसे ज्यादा आनंद की प्राप्ती होती है! उनके हिसाब से देखा जाए तो, वे इसे स्वर्ग में जाने का सीधा टिकट मानते हैं!

वैसे तो हर रिश्तेदार की अलग अलग भूमिका होती है, पर जो खामियां निकालें वो थोड़े स्पेश्यल वाले होते हैं! हम लोग भी इन जैसे रिश्तेदारों से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहते हैं! अगर गल्ती से भी आपका कोई काम बिगड़ा, तो तुरन्त आपको दिल्ली वाली चाची याद आ जाती हैं, और आप उन्हें कोसना नहीं भूलते हैं कि
*ये साला उन्हीं की वजह से हुआ होगा*!
कुछ भी हो इन्हें समय-समय पर याद करना हमारी भी आदत बन जाती है!

शायद इसे पढ़कर मुझ में भी कोई खामियां निकालने को तैयार बैठा हो! पर अपना सिद्धांत तो वही राज़ेश खन्ना वाले गीत पर आधारित है:
*कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना!*

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